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कोरोना संक्रमण के बीच बहुमूल्य हीरा शहर ने खो दिया

मुक्तिधाम पर ब्र्हमाकुमारी समिता दीदी को अंतिम विदाई, देह पंचतत्व में लीन, विधायक सिसोदिया समेत गणमान्य जनों ने सम्मिलित होकर दी श्रृद्धाजंलि

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कोरोना संक्रमण के बीच बहुमूल्य हीरा शहर ने खो दिया


मंदसौर। अपने नाम के अनुरूप सहज, सरल और मधुर मुस्कान के साथ 38 वर्षो में प्रजापिता ईश्वरिय विश्वविद्यालय की सेवाओं को पूरे समपर्ण के साथ मंदसौर जिले के प्रत्येक गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने वाली ब्रह्माकुमारी समीता दीदी का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पंचतत्व में लीन हो गया। मुक्तिधाम पर इंदौर झोन की मुख्य क्षेत्रिय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता बहन समेत ब्रह्माकुमारी बहनों ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर विधायक यशपालसिंह सिसोदिया समेत, सामाजिक, राजनैतिक, स्वयंसेवी संगठनों, मीडिया सहित अनेक गणमान्यजनो ने कोरोना नियमों का पालन करते हुए अश्रुपूरित, सजल नैत्रों से उन्हें अंतिम विदाई दी। 

ब्रह्माकुमारी समीता बहन की अंतिम यात्रा तलेरा विहार स्थित आत्मकल्याण भवन से प्रारम्भ हुई इसमें कोरोना प्रोटोकाॅल के कारण सीमित संख्या में ही ब्रह्माकुमारी बहने और शहर के गणमान्यजन उपस्थित थे लेकिन इससे पूर्व आत्म कल्याण भवन पर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनार्थ रखा गया था जहां गुरूवार की शाम से ही मंदसौर शहर से लेकर दूरस्त अंचल तक के ग्रामीण समीता बहन को श्रृद्धासुमन अर्पित करने के लिए पहुंचे और पुष्पाजंलि अर्पित कर श्रृद्धाजंलि दी। भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, लोकसभा के पूर्व संचेतक राकेशसिंह ने भी दुरभाष पर विधायक यशपालसिंह सिसोदिया के माध्यम से अपनी श्रृद्धाजलि अर्पित की।

मुक्तिधाम पर आयोजित शोक श्रृद्धांजलि सभा में वरिष्ठ विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने बीके समिता बहन को श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कोरोना की वैश्विक महामारी ने अनेक लोगों को कालकवलित किया है लेकिन शहर ने समिता बहन के रूप में बहुमूल्य हीरा शहर ने खो दिया है। 38 बरस पहले दीदी अकेली मंदसौर आई थी और आज अकेली चली गई लेकिन उनका जो संकल्प था ,सपना था अध्यात्म के प्रति जो उनकी विचारधारा थी वह सदैव प्रेरित करेंगी । संस्था को लक्ष्य पर पहुंचाने का संकल्प वास्तव में समिता बहन से सिखना चाहिऐ जिन्होंने प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय के रूप में मंदसौर को नई पहचान दी है। मंदसौर से लेकर गरोठ-भानपुरा और नगरी, धमनार, धुंधडका, पिपलियामंडी, नारायणगढ़ जैसे ग्रामीण अंचल तक में पारिवारिक नाता कायम किया। शासन-प्रशासन, सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संगठनों तक को उन्होंने मार्गदर्शन प्रदान किया। मुझ जैसे कई लोगों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया है। जिस संकल्प और लक्ष्य को लेकर दीदी ने मंदसौर को सेवाऐं की है वह वास्तव में मिल का पत्थर साबित होगी। उनका समर्पण, उनका व्यक्तित्व सदैव प्रेरणादाई रहेगा।

श्री सिसोदिया ने कहा कि समिता बहन एक अधिष्ठाता थी, नींव से शिखर तक की यात्रा में उनकी जीवटता, उनके विराट व्यक्तित्व  का ही कमाल था कि उन्होंने अपनी सेवाएं केवल संस्था तक नहीं दी बल्कि शासन, प्रशासन, समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठनों यहां तक कि उनसे जूड़े प्रत्येक व्यक्ति का उनसे पारिवारिक नाता बन गया था। शिक्षक, न्यायाधीश, विघार्थी, व्यापारी, उघोगपति, एडव्होकेट, मीडिया से लेकर ग्रामीण अंचल का खेतीहर किसान तक उनसे पारिवारिक रूप से जूडा था। संकट के समय में वे एक अभिभावक की भांति उठ खड़ी होती थी, अपनी प्यारी सी मुस्कान से ही वे हर परिस्थिति का समाधान कर देती थी। शासन, प्रशासन, सामाजिक, स्वयंसेवी संगठनों को उनके आदेश का इंतजार होता था, लोगों के सुख-दुःख में वे सदैव सहभागी रहती थी। पूरे जिले भर मंे उन्होंने एक विशाल परिवार खडा किया उनसे जुड़ा ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसे वे नाम से ना पहचानती थी। उनके सिद्धान्त, उनके वचन, उनके प्रवचन, उनकी भावना और उनकी भक्ति प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी रहेगी। 

इंदौर झोन की मुख्य क्षेत्रिय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने समिता बहन को श्रृद्धाजंलि देते हुए उन्हें कर्मठ, शक्तिशाली बताया और कहा कि रायपुर में जन्मी, छत्तीसगढ़ के कई सेवा केन्द्रों पर सेवाएं देकर इंदौर, खंडवा के बाद मंदसौर में ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सेवाओं में समर्पित रहीं इसी का परिणाम था कि मंदसौर जिले में अनेक जगहों तक सेवाकेन्द्र पहुंचाऐ, भवनों का निर्माण कराया। समीता बहन को प्यार से सभी सोमी बहन कहते थे उन्होंने अपने नाम के अनुसार ही सौम्यता, मधुरता और प्यार के साथ सभी को अपने से जोडा था। यहीं कारण है कि आज मंदसौर में उनके इतने चाहने वाले है।

आपने कहा कि एक माह पूर्व कोरोना से संक्रमित हुईं। उन्हें इंदौर ले जाया गया, उपचार के दौरान सौ प्रतिशत आॅक्सीजन पर वे रहीं लेकिन इस कष्ट के समय में भी वह पूरी तरह से शांत चित्त रहीं। उनका उपचार करने वाले चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाॅफ तक हैरान था, वे यहां तक कहने लगे थे कि ऐसा मरीज पहली बार देखा है जो कहें, जैसा कहें वैसे ही उसको स्वीकार कर लेती है, अंदर भले ही कष्ट हो लेकिन चेहरे पर कभी कष्ट को झलकने नहीं दिया। मंदसौर की धरणी के प्रति उनका लगाव अंतिम समय तक रहा। अपने पूरे उपचार के दौरान भी वे लगातार मंदसौर आने का ही कहती रहीं। आॅक्सीजन सर्पोट पर थी बावजूद इसके डाक्टर से यहीं कहती यह मशीन मुझे दे दिजिए इसे लेकर मै मंदसौर चली जाउंगी । 

आपने कहा कि अपने विराट व्यक्तित्व के कारण उन्होंने मंदसौर जिले में एक पहचान बनाई है, नाम कमाया है, सेवा केन्द्र की गतिविधियों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाया है अब उनके शुरू किए कार्यो को सभी मिलकर पूरा करे यहीं सोमी बहन को सच्ची श्रृद्धांजलि होगी। 

श्रृद्धांजलि सभा को इंदौर प्रेम नगर सेंटर की संचालक बीके शशी दीदी, कोटा सेवा केन्द्र की संचालिका बीके उर्मिला दीदी एवं रतलाम  सेवा केन्द्र की बीके समिता दीदी ने भी अपनी शब्द श्रृद्धांजलि अर्पित की तथा जावरा सेवा केन्द्र की बीके सावित्री दीदी, बीके गीता दीदी, सुवासरा सेंटर से बीके श्यामा दीदी, शामगढ़ सेवा केन्द्र से बीके उषा दीदी, बीके कृष्णा दीदी ने पुष्पाजंलि अर्पित की। इससे पहले स्थानीय आत्म कल्याण भवन पर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष मदनलाल राठौर, वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश जोशी, लोकेश पालीवाल, रविन्द्र पाण्डेय, सत्येन्द्रसिंह सोम, राघवेन्द्रसिंह तोमर, राजाराम तंवर समेत अनेक गणमान्यजनों ने अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित की।

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