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विधायक सिसोदिया के सुझाव पर महज 18 घंटे में सीएम ने बदला योजना का नाम

पेंशन शब्द का हुआ विलोपन अब मुख्यमंत्री कोविड.19 बाल कल्याण हुआ योजना का नाम

विधायक सिसोदिया के सुझाव पर महज 18 घंटे में सीएम ने बदला योजना का नाम


मंदसौर। वैसे तो जनता के हितों और विकास के लिए विधायक यशपालसिंह सिसोदिया सदैव संकल्पित और प्रयासरत रहते है कोरोना की महामारी के दौरान उन्होंने आम जन की कठिनाईयों से लेकर उनके समाधान और कोरोना महामारी से लढ़ने के लिए इंतजामात को जूटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहीं कारण है कि आज मंदसौर उन चुनिंदा जिलों में शूमार हुआ है जहां के बड़े अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा मरीजों को मिल रहीं है,। आरटीपीसीआर की जांच लेब शुरू होने वाली है, ब्लड़ प्लाज्मा सेपे्रेरेशन यूनिट शुरू हो चूकी है, ऑक्सीजन के उत्पादन में अस्पताल आत्मनिर्भर बन चूका है। इसके साथ ही उनकी पहल कोरोना में अपने माता-पिता को खोकर अनाथ हुए बच्चों के लिए ताकत बनेगी, उन्हें अब सरकार की पेंशन का नहीं बल्कि एक अभिभावक की तरह सरकार की ताकत का आसरा मिलेगा, मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना सहारे उनकी वर्तमान आवश्यकतों की पूर्ति होगी, उनकी शिक्षा, आजीविका के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाऐगा। 

दरअसल प्रदेश में कोरोना की महामारी में अपने माता-पिता अथवा दोनों में से किसी को एक को खोकर कई बच्चें अनाथ हो चूके है। मंदसौर जिले में इनकी संख्या करीब 125 है । इन बच्चों के लालन-पालन के साथ ही उनकी वर्तमान की आवश्यकताओं से लेकर जीवन यापन, शिक्षा और बड़े होकर आत्मनिर्भर बनाने तक का संबल प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान द्वारा प्रारम्भ की गई मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना बनेगी। पूरे भारत वर्ष में माॅडल के रूप में पहचानी गई इस योजना का नाम सरकार ने मुख्यमंत्री बाल पेंशन योजना रखा था इसकों लेकर 18 घंटे पूर्व यानी सोमवार की शाम को मंदसौर के वरिष्ठ विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने वीसी के माध्यम से चर्चा में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान का ध्यान आकर्षित किया था और सुझाव देते हुए कहा था कि जिन बच्चों ने कोरोना में अपने माता-पिता को खो दिया है और अनाथ हो गऐ है उन्हें सहायता के साथ मानसिक संबल की भी आवश्यकता है ऐसे में उन्हें बचपन से पेंशन के नाम से सहायता देने से उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचेगी इसलिए इस योजना का नाम बदलकर ऐसा किया जाऐ ताकी बच्चें का बाल मन आहत ना हो। श्री सिसोदिया ने यह भी कहा कि योजना का नाम वात्सल्य, ममतामई या इस तरह का कोई और भी नाम हो सकता है ताकी बच्चों को बाल्यकाल में ऐसा ना लगे कि अब उनका कोई नहीं है इसलिए सरकार से उन्हें पेंशन मिल रहीं है। सरकार ने इस योजना को अनाथ हुए बच्चों के अभिभावक बनकर लागु की है इस योजना से लाभांवित होने वाले बच्चें अनाथ नहीं है बल्कि प्रदेश की सरकार उनकी अभिभावक है, सरकार उनकी वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही उनके अध्ययन ओर आजीविका तक की चिंता करेगी। 

श्री सिसोदिया के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने तत्काल इस पर विचार का आश्वासन दिया था बल्कि महज 18 घंटों में ही इस पर निर्णय भी कर लिया। इस महत्वपूर्ण योजना से पेेंशन शब्द को विलोपित कर अब इसे मुख्यमंत्री कोविड 19 बाल कल्याण योजना करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसी नाम से हरियाणा और उत्तप्रदेश सरकार भी योजना शुरू करने जा रहीं है। 

विधायक श्री सिसोदिया की कोशिश ने बच्चों के बाल मन को आहत होने से बचा लिया अब वे पूरे सम्मान के साथ सरकार को अपने अभिभावक के रूप में स्वीकार पाएंगें और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के सहारे अपने माता-पिता की कमी को बहुत हद तक पूरा करते हुए अपने जीवन को निखार पाऐगे, शिक्षित बनकर आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढाऐगें।

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